कृष्णेन्द्र कथा
कृष्ण बने द्वारकाधीश, फिर जगन्नाथ और अब बने कृष्णेन्द्र। कृष्णईष्ट मंदिर में दरबार लगा कृष्णेन्द्र का 29 अक्टूबर को। जीवन जीने की दिशा बताते हैं कबीर जी के दोहे। वे बताते है कि ज्ञान कैसे कमाना है । योग्यता कैसे बढानी है ज्ञान प्राप्त करने के लिए। अपने कर्मफलों के अनुसार ही मिलता है शरीर। बाकी सभी योनियां भोग योनि है, यानी सिर्फ भुगत सकते हैं अपने कर्मफल। मनुष्य योनि योग योनि है यानी आप decide कर सकते हैं कि आपको भुगतना कैसे है। वेद है user manual मनुष्य योनि के लिए। यदि पढ़ना नही आया तो experimenting की तरफ मुड़ जाते है, जो कि कई बार नुकसान कर सकता है। Technology को use करना आना चाहिए। किसने बनाई, क्यों बनाई, या कैसे, यह जानना इतना जरूरी नही है। हर physical body को use करने से पहले उसके नियम जान लेने चाहिए। जैसे 33 करोड़ देवी देवताओं के बारे में बात की जाती है। इसे एक धर्म से जोड़कर देखा जाता है। जबकि universal नियम सभी पे लागू होते है। जैसे श्वास के नियम, सूर्य से energy रिसीव करने के नियम। किसी एक धर्म या विश्वास से जोड़कर आप technology को reject कर नही सकते। करे त...