Confusion removed
गुरु शुक्राचार्य अश्वनीजी के guidance में कृष्णेन्द्र कथा शुरू की गई है,confusion से निकलना सिखाने के लिए।
कृष्णराज्य की implementation का काम अब शुरू हो चुका है, तो हर तरह के कष्ट से निकलना अब मुमकिन है।
जीवन मे तीन तरह के कष्ट होते है, एक ज्ञान की कमी, फिर बुद्धि के decision making की कमी, और ऊर्जा की कमी।
इस शरीर की सीमा को समझना होगा, क्योंकि confusion से निकलने के लिए अपने शरीर को समझना जरूरी है। ब्रह्मा जी ने स्त्री को बनाया तो साथ मे वरदान दिया कि किसी भी पुरुष को बुला सकती हो। अब योग यानी जुड़ना का कांसेप्ट गायब होता गया। क्योंकि समाज में यह समझ नही आ पाई कि यह स्त्री का निर्णय है कि उसे किस से जुड़ना है यानी विवाह करना है। और confusion की layer बढ़ती चली गयी।
पति की किस्मत पत्नी से जुड़ जाती है, ये त्रेता युग के युगल भगवान राम सीता के जीवन से दिखता है। क्योंकि सीताजी का योग रामजी से हो चुका था स्वयम्वर से पहले ही, और ये बात राजा जनक को नही बतायी गई। छल हुआ और यही भुगतना पड़ा राम सीता को आयु भर।
पहला confusion female को कि जिसको चाहे बुला सकती है, और experimenting शुरू कर दी, दूसरा confusion समाज को कि स्त्री किससे विवाह करेगी यह निर्णय कोई और ले सकता है। विवाह बंधन बनना शुरू हो गया, और दिशा भरम होता गया।
जीवन मिलता है खर्च करने को, अपने कर्मफल को। लेकिन माना यह जाता है कि किसने कितना कमाया, पैसा प्यार या publicity। confusion बढ़ता गया कि मनुष्य जीवन कमाने के लिए मिलता है, जबकि बच्चा जब जन्म लेता है तो उसकी मुट्ठी बन्द होती है। इससे पता लगता है कि अपने साथ कुछ लेकर आया है,जो उसे खर्च करना है सही दिशा में।
दिशा ज्ञान confusion की वजह से नही हो पा रहा था,पर अब सम्भब है। कृष्णेद्र दरबार अब लग चुका है planet earth पर। कृष्ण इंद्र गद्दी पर बैठेंगे इसकी तैयारी तो महाभारत से पहले ही हो गयी थी। इंद्रप्रस्थ बनवाया था युधिष्ठिर से, जो अब दिल्ली के नाम से जाना जाता है। फिर कृष्ण ने युद्ध करवाया, जो लोग मारने की इच्छा रखते थे एक दूसरे को, उन सभी को पृथ्वी से हटवा दिया। निश्छलता के पसारे की तैयारी शुरू की गई।
पृथ्वी के सभी राजाओ ने participate किया उस युद्ध में। पृथ्वी पर जो भी रहने के लिए उपयुक्त स्थान था, उसे भारत कहा जाता था, यानी आभा युक्त स्थान। हर मनुष्य को इस पृथ्वी पर रहने का अधिकार है। प्रकृति से ले आप हवा,पानी जीने के लिए सामान। लेकिन अधिकारी यानी deserving आपको बनना पड़ेगा।
कृष्णईष्ट भगवान हैं कृश्नांश भगवान के एक रूप। कृष्ण के ईष्ट हुए ये। इन्ही से सलाह लेने जाते थे कृष्ण, जब वे विराट रूप लेते थे। कृष्णईष्ट भगवान के ईष्ट हैं कुच्छनाकर गुरु जी.
खुद को पुनर्जन्म के लिए तैयार करना जरूरी है, यानी recycling के लिए तैयार होना। इसी शरीर के साथ पुनरजामा होना possible है, जिससे benefit होता है कि पुराने relations रहते है, आपकी learning आपके साथ रहती है, यही शरीर मे नया जन्म मिल जाता है। नई सोच नई दिशा मिल जाती है जीवन की।
Recycling हांडी की निष्ठायोग विधि से पूजा करने से आप पुनर्जन्म के लिए खुद को तैयार कर सकते है
अपने आपको दूसरों की jealousy से बचाना possible होता है। दक्षणया शील्ड बनानी सीखनी होती है, जो 40 दिन में बननी शुरू होती है। procedure follow करना होता है जैसे बताया गया है।
इस लिंक पर कृष्णेद्र कथा सुन सकते है
https://youtu.be/hgnT8fGY5M0
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