कृष्ण का सफर द्वारकाधीश से कृष्णेन्द्र तक

Present यानी वर्तमान में हम या तो अपने कर्मफलों को enjoy करते हैं या कष्ट झेलते हैं।  positive attitude रखना चाहिये, ये तो बहुतो ने कहा। लेकिन reality को reject कर देना या उससे आंखे मूंद लेना कोई solution नही है समस्याओं का।
अब कृष्णराज्य चल रहा है जिसमे confusion की कोई जगह नही। कृष्ण के जीवन को समझें तो कृष्ण बचपन मे कहलाये गोपाल, क्योंकि नंद के घर पले। वहाँ गाय पालने का काम होता था इसलिए कहलाये वे गो पाल। फिर कंस का वध करने के बाद उन्होंने द्वारका नगरी बसाई। और कृष्ण कहलाये द्वारकाधीश। तभी उन्होंने पृथ्वी से छल समाप्त करने का काम शुरू किया। महाभारत के युध्द की रचना हुई । उन्हीं 18 दिनों में बलराम, जो कि कृष्ण के बड़े भाई, और शेष के रूप थे, ने निश्छलता के बीज बोए। हलधर कहलाते थे बलराम। 
फिर कृष्ण पहुंचे जगन्नाथ पुरी, बलराम और सुभद्रा, कृष्ण की बहन, के साथ। वहाँ पर मंदिर में मूर्ति रूप में रहे।
उसके बाद nov 2019 में पूरी से दिल्ली आ गए। कालकाजी मंदिर के पास एक काली माई चौक है, जिसके 3 मील के घेरे में निष्छल टेम्पल काल सर्कल है। वही कृष्ण रहे, और अब बन चुके हैं वे कृष्णेन्द्र। इन्द्रप्रस्थ इसलिए ही बनवाया था कृष्ण ने, 5000 साल पहले, क्योंकि वहीं से चलना था कृष्णराज्य।
कृष्णेन्द्र हमारी galaxy के राजा हैं। एक galaxy में बहुत से solar system हो सकते है। हर एक solar system में एक सूर्य और एक चंद्रमा होता है। अपनी galaxy के बाहर का मनुष्य नही जान सकते।
कहते हैं कि महाराजा अग्रसेन कई पृथ्वियों के राजा थे। महाभारत काल से पहले आये थे अग्रसेन। और कृष्ण भी उन्हीं के वंशज थे। महाराजा अग्रसेन ने एक सिक्का एक ईंट की परंपरा शुरू की थी, जिसके तहत कोई भी उनके राज्य में आकर रह सकता था, जिसके पास कुछ समाज के लिए उपयोगी skills हो। लोकतंत्र की भी नींव उन्होंने ही रखी। योग्यता main है यह उन्होंने ही बताया। समाज मे किसी भी तरह का crime न हो, ऐसा system बनाया उन्होंने।
ईमानदारी की रोटी सब खाये, यह ensure किया उन्होंने।

लेकिन कृष्ण जब आये तो उन्होंने देखा कि छल छोड़ने के लिए तैयार नही थे वो लोग जो समाज के leaders थे, राजा महाराजा थे। उनकी बुआ कुंती के घर में ही cousins के बीच मे ईर्ष्या चरम पर थी। योग्यता मारने की कमा रखी थी और युद्ध करना ही धर्म माना जाता था। तब उन्होंने महाभारत का युद्ध रचाया जिसमे करोड़ो पुरुष, जो मारने में यकीन करते थे, वे सभी मारे गए। पर जो विधवाएँ और बच्चे रह गए, उनको सही दिशा दिखाने का काम बाकी था। परीक्षित राजा बने, जिन्हें कृष्ण ने ही ambdded technology को use करके मृत से जीवित किया था। कलियुग के पसारा हुआ परीक्षित के राज में।

महाभारत के बाद यह तो समझ गए पृथ्वीवासी, कि युद्ध से कुछ प्राप्त नही होता। लेकिन जीवन मे प्राप्त क्या करना है यह जानना बाकी रह गया। इसलिए अब कृष्ण कृष्णेन्द्र बनकर बैठे है । दक्षणया तत्वगुरु जी ही galaxy के गुरु हैं। अब सभ्य समाज का निर्माण का कार्य शुरू हुआ है। लोगो की सोच में फर्क आता जा रहा है। धर्म की स्थापना अब होने लगी है। confusion की layer हटनी शुरू हो चुकी है। भगवान को जानना समझना, सभी को basic need लगने लगी है। 
अब कुच्छल वेद को समझना भी possible हो गया है, जिसके लिए योग्यता कमानी होगी सिर्फ।

आज की कृष्णेन्द्र कथा इस link पर सुन सकते हैं 

https://youtu.be/o75HIUslMuM

Comments

Popular posts from this blog

Confusion removed

कृष्णेन्द्र कथा